नर्मदापुरम। देश भर के करोड़ों अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से संबंधित छात्रों एवं युवाओं से केंद्रीय संस्थाओं में हर वर्ष नया जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत कराने की अनिवार्यता के मुद्दे को मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम की राज्यसभा सांसद माया नारोलिया ने बुधवार को राज्यसभा संसद में उठाया है। उन्होंने इस मुद्दे से अवगत कराते हुए कहा कि सरकार इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान दे इससे छात्रों को हर वर्ष अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ता है। जिससे न केवल समय और संसाधनों की बर्बादी होती है, बल्कि कई बार योग्य अभ्यर्थी अंतिम तिथि तक प्रमाण पत्र ना जमा कर पाने के कारण सुनहरे अवसरों से वंचित रह जाते हैं।
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम की रहने वाली राज्यसभा सांसद माया नारोलिया ने राज्यसभा संसद सत्र के दौरान अपनी बात सभापति भुवनेश्वर कालीता के सामने रखी। इस दौरान उन्होंने कहा कि तत्वादीय पद पंकजम नमामि देवी नर्मदे धन्यवाद उपसभापति महोदय आपने इस महत्वपूर्ण विषय पर मुझे बोलने का अवसर प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि मैं आपके माध्यम से सरकार का ध्यान एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर आकर्षित कराना चाहती हूं जो देश भर के करोड़ो अन्य पिछड़ा वर्ग ओबीसी से संबंधित छात्रों और युवाओं से जुड़ा हुआ है। यह एक स्थापित तथ्य है की केंद्रीय सेवाओं में और शैक्षणिक संस्थानों में और ओबीसी आरक्षण का लाभ लेने के लिए उम्मीदवारों को हर वर्ष नया जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है।
जबकि (अनुसूचित जाति एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसट) वर्ग के उम्मीदवारों के लिए ऐसी कोई वार्षिक नवीनीकरण की प्रक्रिया अनिवार्य नहीं है। माननीय महोदय यह दोहरा मापदंड न केवल अनुचित है। बल्कि इससे छात्रों को हर वर्ष अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ता है। जिससे न केवल समय और संसाधनों की बर्बादी होती है, बल्कि कई बार योग्य अभ्यर्थी अंतिम तिथि तक प्रमाण पत्र ना जमा कर पाने के कारण सुनहरे अवसरों से वंचित रह जाते हैं। मैं सरकार से अनुरोध करती हूं कि इस विषय पर गंभीरता से विचार करें और ओबीसी अभ्यर्थियों के लिए और जाति प्रमाण पत्र को स्थाई रूप से मान्यता देने की व्यवस्था करें जैसा कि एससी एसटी वर्ग के लिए प्रचलित है।
स्पीच राज्यसभा सांसद माया नारोलिया